मेला लग जायेगा उस दिन शमशान मे,
जिस दिन मे चला जाँऊगा आसमान मे
जाने कब आँख लगी, यादों के दीये जलते रहे, रोशनी घुलती रही, ख्वाबों में तेरी महक आई है !
तुम साथ हो तो मुकद्दर पे हकुमत हैं अपनी। बिन तेरे ज़िन्दगी की औकात ही क्या हैं।।
शक करके बर्बाद होने से अच्छा है कि, विशवास रखकर लुट जाये
कई रिश्तो को परखा तो नतीजा एक ही निकला…, जरूरत ही सबकुछ है, मुहब्बत कुछ भी नहीं..
बताओ ज़रा कौन सी बहार ले आया है जनवरी . . सब कहते थे बड़ा वीरान है दिसंबर..!!
-Kitnii Pagal Hoon Naa Meiin ..? Kay Tum Se Waffa Kii Umeed Rakhti Hoon .. ‘
Toot Jata Hai Raabta khud Say Tujh Say Jab Raabta Nahi Hota.
इतनी ठोकरे देने के लिए शुकरि्य़ा ‘ऐ’ जिन्दगी…. चलने का ना सही….. सम्भलने का हुनर ताे आ ही गया….
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