~Bahot Mehsoos Hota Haii, Tera, Mehsoos Na Karna .. ‘
बिछड़े थे किस गुरूर से वो भी तो याद कर, आए जो अब आँख में आँसू,फिज़ूल हैं…!!
-Woh Niibha Na Saka Yeh Alag Baat Hai, Par Kiiye The Jo Waade Gazab Ke The .. ‘
हमने तुम्हें उस दिन से और ज़्यादा चाहा है, जबसे मालूम हुआ के तुम हमारे होना नही चाहते.
गलतफहमी में जिंदगी गुजार दी,, कभी हम नहीं समझे कभी तुम नहीं समझे
दोस्तों ने हमें कूटा , दुश्मन में कहाँ दम था, पिट पिट के भी हँसता रहा, मैं इतना बेशरम था
-Kitnii Pagal Hoon Naa Meiin ..? Kay Tum Se Waffa Kii Umeed Rakhti Hoon .. ‘
मुझे फर्क नहीं पता अपनो और गैरो का, हर कोई हँसा है मुझे रोता देखकर
वो भी आधी रात को निकलता है और मैं भी, फिर क्यों उसे “चाँद” और मुझे “आवारा” कहते हैं
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