कुछ लोग आए थे मेरा दुख बाँटने मैं जब खुश हुआ तो खफा होकर चल दिये
पतंग सी हैं जिंदगी, कहाँ तक जाएगी..! रात हो या उम्र, एक ना एक दिन कट ही जाएगी.
गलती उनकी नहीं कसूरवार मेरी गरीबी थी दोस्तों, हम अपनी औकात भूलकर बड़े लोगों से दिल लगा बैठे.
Bin Mangay Hi Mil Jati Hain Tabeerain Kisi Ko, Koi Khali Hath Rah Jata Hain Hazaroon Duaoon Ka Baad
सच के रास्ते पे चलने का.. ये फ़ायदा हुआ, रास्ते में कहीं भीड़ नहीं थी ।
इक झलक जो मुझे आज तेरी मिल गयी मुझे फिर से आज जीने की वजह मिल गयी
हाथ मे बस एक ‘बासुँरी’ कि कमी है वरना, गोपिया हमने भी कई ‘फसाई’ है..!!
Wo ‘mili bhi to sirf khuda ke darbaar mein, Ab tum hi batao yaaron hum ‘ibaadat karte ya mohabbat’.
तमननाओ की महफिल तो हर कोई सजाता है पर . पुरी उसी की होती जो तकदीर लेकर आता है
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *