मैं मानता हूँ खुद की गलतियां भी कम नहीं रही होंगी मगर बेकसूर उन्हें भी कहना मुनासिब नहीं
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रोना ही है ज़िन्दगी तो हँसाया क्यो.. जाना था दूर तो नज़दीक़ आया ही कयो
~सुना है कि तुम रातों को देर तक जागते हो यादों के मारे हो या मोहब्बत में हारे हो l
Kya? Phir EK Mitti K Mujsmay Say Umeed_e_Wafa,,, Aay DIL Tujhay Such Main Izzat Raas Nahi….?
मैं क्यो #कहुँ की बात करो #मुझसे.. क्या उसे नही #पता कि कोई नही मेंरा #उसके सिवा
Meri Wafa Fareb Thi,, Meri Wafa Pe khaak Daal.!! Tujh Sa Hi koi Ba’Wafa Tujh Ko Mily Khuda Kary.!!
“Kabhe be wajha yun he baras parti hain ankhen” “Oudas hone ka koi sabab nahe hota”
कुछ लोग आए थे मेरा दुख बाँटने मैं जब खुश हुआ तो खफा होकर चल दिये
होंठों की हँसी को न समझ हकीकत-ए-ज़िंदगी, दिल में उतर कर देख कितने टूटे हुये हैं हम!
