मोहब्बत हो या काला धन….. छुपाकर रखोगें तो नुकसान खुद का ही है..
आज रुठा हुआ इक दोस्त याद आया, अच्छा गुजरा हुआ कुछ वक्त बहुत याद आया।
“सूखे हुए दरिया से इक नाव लगी कहने, अपना भी जाने अब किस बात से रिश्ता है
यही सोच कर उसकी हर बात को सच मानते थे.. की इतने खुबसूरत होंठ झूठ कैसे बोलेंगे..
तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी, और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ..!
वो कागज आज भी फुलो से ज्यादा महकता है दोस्तों जिस पर उन्होंने मजाक में लिखा था कि हमें तुमसे Continue Reading..
~Tum Jo Kehte The Acha Haii Zamana Hum Se, Ye Batao K Mila Koi Hamarey Jaisa .. ?
इक झलक जो मुझे आज तेरी मिल गयी मुझे फिर से आज जीने की वजह मिल गयी
पत्थर समझ कर हमे मत ठुकराओ कल हम मंदिर मे भी हो सकते है
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