“”कुछ तो रहम कर ए-संग दिल सनम, इतना तङपना तो लकीरों मे भी न था..
बस वो मुस्कुराहट ही कहीं खो गई है.!!* *बाकी तो मैं भी बहुत खुश हूँ आजकल.
Us Ke Ik Ik Lamhe Ki Hifazat Karna, AY KHUDA Masoom Saa Chehra Hai Udaas Ho To Achaa Nhi Lagta…!!!
ये दरिया-ए-अफसाना कभी ख़त्म ही नही होता ना तुम आते ना ये यादों का कारवां ही ख़त्म होता….
तुम्हारे हर सवाल का जवाब मेरी आँखों में था और तुम मेरी जुबान खुलने का इंतज़ार करते रहे।
-Unse Kehdo Hamarii Sazza Kuch Kam Kardey, Hum Mujrim Nahii Bas Galti Se Ishq Hua Haii .. ‘
कलम में जोर जितना है जुदाई की बदौलत है… मिलने के बाद लिखने वाले लिखना छोड़ देते है…
लाख मिठाइयां चखी हो तुमने मगर.. खुशी के आंशू का स्वाद सबसे मीठा है
~Izhar’E-Ishq Me Aiisa Hua Kuch Wo, Dil Ka Haqdaar To Hua Lekin Mera Naa Hua .. ‘
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