हम सा काहिल न मिलेगा कहीं खुद ख्वाहिशें हमसे तंग सजन
नींद छीन रखी है उसकी यादो ने मेरी, गिला उसकी दूरी से करूँ या अपनी चाहत से
मेरे दिल की ख़ामोशी पर मत जाओ “साहेब*”, *राख के नीचे ही अक्सर आग दबी होती है*…
~Tujhe Roz Dekhu Kareeb Se Mere Shoq Bhii Haii Ajeeb Se .. ^
बहुत थे मेरे भी इस दुनिया मेँ अपने, फिर हुआ इश्क और हम लावारिस हो गए..!
सिर्फ दिल का हक़दार बनाया था तुम्हें…… हद हो गयी तुमने तो जान भी ले ली..
बेवफाई तो सभी कर लेते है जानेमन , तू तो समझदार थी कुछ तो नया करती
~ Bohat Khush Qismat Hain Wo Log Yaqeen Jano .. Jo Mangty B Nahi, Rotay B Nahi,Or Muhabbat Paa letay Continue Reading..
अपनों की चाहत मे मिलावट थी इस कदर. मैं तंग आकर दुश्मनों को मनाने निकल गया..
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