जरूरी नही हर ख्वाब पूरा हो… सोचा तो उसे ही जाता है जो अधूरा हो….”
वो मेरा हमसफर भी था वो मेरा राहगुजर भी था, मंजिलें ही एक न थीं, दरमियाँ ये फासला भी था।
Roz Khawabon K Jazeeron Me Nikal Jata Hun Tujh Se Milne Ki Nayi Raah Nikali Mene…
बड़ी बारीक़ी से पढ़ लेते है वो ख़ामोशी मेरी, बार बार यू मुझे अपना बनाना उन्हें बख़ूबी आता है।।
कोई चेहरे का दीवाना, किसी को तन की तलब!! अदाएं पीछा करवाती हैं, मोहब्बत कौन करता है
मेरी आँखों की औकात नही की किसी लड़की को घूर सके, याद रहता है खुदा ने एक बहन भी मुझे Continue Reading..
रोज़ ख्वाबों में जीता हूँ वो ज़िन्दगी … जो तेरे साथ मैंने हक़ीक़त में सोची थी
दो हिस्सों में बंट गए है, मेरे दिल के तमाम अरमान… कुछ तुझे पाने निकले, तो कुछ मुझे समझाने निकले….
वो आईनें मे देख रहे थे, बहारे हुस्न ॥ आया मेरा ख्याल तो शरमा के रह गये ॥
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