गुज़र रहा हूँ तेरे शहर से क्या कहूँ क्या गुज़र रही है.
~Jab Tak Ziinda Hoon Mere Hoke Jee’Lo, Kuch Hi Diin Ki Baat Haii Phiir Jo Chahe Kar Lena .. ‘
-Kuch Es Tarah Se Naraaz Haii Woh Humse, Jaiise Unhe Kisii Aur Ne Mna Liiya Ho .. ‘
~Mere Haq Me Khushiyon Ki Dua Karte Ho, Tum Khud Mere Kyun Nahi Ho Jate .. ^
मोह्हब्ब्त किसी से तब ही करना जब निभाना सिखलो .. मजबूरियों का सहारा लेकर छोड़ देना वफादारी नही होती.
यूँ तो आदत नहीं मुझे मुड़ के देखने की… तुम्हें देखा तो लगा…एक बार और देख लू…
अजीब है इन्सान की शख़्सियत यारों, हवस ख़ुद की उठती है “तवायफ़” उसे बोलता है…
एक सुखी पति था………….. * * * * * * * * * * जाँच चल रही है किसका था।
क्यों पहनती हो चूड़ी, क्यों पहनती हो कंगना,* *सजने का ही शोक है तो फिर बना लो न सजना .😀
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