गुज़र रहा हूँ तेरे शहर से क्या कहूँ क्या गुज़र रही है.
यकीन नहीं होता फिर भी कर लेता हूँ…!!! . . जहाँ इतने हुए..एक और फरेब हो जाने दो…!!!
Yeh Zaroori Nahi Ki Har Baat vo Meri Samjhe.. Zaroori Yeh Hai Ki vo Mujhe Kuch To SamJhe
तहजीब देखता हूँ मैं गरीबों के घर में दुपट्टा फटा हो फिर भी सर पर होता है
उसके चले जाने के बाद हम महोबत नहीं करते किसी से, छोटी सी जिन्दगी है किस किस को अजमाते रहेंगे|
बहुत खूब कहा है किसी ने जी लो हर पल को वरना ना जिदगी रहेगी और ना ही पल
तुम चलो तो ये ज़मीं साथ दे ये आसमान साथ दे हम चले तो साया भी साथ ना दे
हम तो बिछडे थे तुमको अपना अहसास दिलाने के लिए, मगर तुमने तो मेरे बिना जीना ही सिख लिया।
हम ना पा सके तुझे मुदतो के चाहने के बाद , ओर किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमे Continue Reading..
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