बेकसूर कोई नहीं इस ज़माने मे, बस सबके गुनाह पता नहीं चलते.
तमननाओ की महफिल तो हर कोई सजाता है पर . पुरी उसी की होती जो तकदीर लेकर आता है
*मैं गलती करूँ तब भी मुझे सीने से लगा ले* *कोई ऐसा चाहिये जो मेरा हर नखरा उठाले*
मैं हँसता हूँ तो बस अपने ग़म छिपाने के लिए.. और लोग देख के कहते है काश हम भी इसके Continue Reading..
लोग गलतियां कर के बदनामी से बच गये…. मैं चंद ख्वाब देख के भी गुनहगार हो गया.
जनवरी से तुम्हें खुशियाँ मिली क्या यारो, मैं तो अब भी तन्हा हूँ दिसंबर की तरह !!
तुम्हारे हर सवाल का जवाब मेरी आँखों में था और तुम मेरी जुबान खुलने का इंतज़ार करते रहे।
बारिश और महोबत दोनों ही यादगार होते हे,❤ बारिश में जिस्म भीगता हैं और महोबत मैं आँखे.
अगर आप अपनी रोटी अच्छी पका रहे है तो, #मक्खन लगाने वाले अपने आप आपके पास आ जाएँगे.
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