*यहां लोग अपनी गलती नहीं मानते* *किसी को अपना कैसे मानेंगे…
यूँ गुमसुम मत बैठो पराये से लगते हो, मीठी बातें नहीं करना है तो चलो झगड़ा ही कर लो…!!
छोटे थे तो सब नाम से बुलाते थे, बड़े हुए तो बस काम से बुलाते है
भूख तो एक रोटी से भी मिट जाती माँ, अगर थाली की वो एक रोटी तेरे हाथ की होती
गुनहगारों की आँखों में झूठे ग़ुरूर होते हैं, हाँ शर्मिन्दा तो सिर्फ़ बेक़सूर होते हैं..!
बेहद हदें पार की थी हमने कभी किसी के लिए, आज उसी ने सिखा दिया हद में रहना….!!
उनकी गलियो से गुजरना तो बहुत आम था… बहाना भी एक कि कोई बेहद जरुरी काम था…
अगर कोई आप पर आँख बंद करके भरोसा करे तो आप उसे ये एहसास मत दिलाओ कि वह सच मे Continue Reading..
नींद छीन रखी है उसकी यादों ने, गिला उसकी दूरी से करें या अपनी चाहत से !!
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