*यहां लोग अपनी गलती नहीं मानते* *किसी को अपना कैसे मानेंगे…
राहों का ख़याल है मुझे.. मंज़िल का हिसाब नहीं रखती। अल्फ़ाज़ दिल से निकलते है.. मैं कोई किताब नहीं रखती।।
तुम्हे फुरसत हो दुनियां से तो कभी आकर मिलना, हमारे पास सिवा फुरसत के और रह क्या गया है..
हर सजा क़बूल की सर झुका के हमने, जैसे कोई बहुत बड़ी भूल कर दी दिल लगा के हमने !!
तेरे चेहरे पे ये शिकन हमें मंजूर नही…!!! . . सुनों तुम खुश रहा करो मैं रहूँ न रहूँ…!!
रिश्ते खराब होने की एक वजह ये भी है, कि लोग झुकना पसंद नहीं करते.
यही सोच कर उसकी हर बात को सच मानते थे.. की इतने खुबसूरत होंठ झूठ कैसे बोलेंगे..
Kisi insan k sath aisa salok na karo jaisa tum apny sath nahi chahty
Na Garz Kisi Se Na Wasta, Mujhe Kaam Hai Apne Kaam Se Tere Zikr Se, Teri Fiker Se , Teri Continue Reading..
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