में किसी ओर का नहीं हु फिलहाल
.. कोई तो मेरी हो जाओ
~ बड़ा अजीब सा जहर था उसकी यादों का सारी उम्र गुजर गयी मरते – मरते .. ^
दिन में ना जाने कितनी बार होता है ऐसा… तेरी याद आना और मेरा उदास हो जाना
~Uljhe Huye Hai Apni Uljhone Meiin Ajkal, Tum Yeh Na Samjhana Ke Ab Woh Chahat Na Rahii..
फिर से वही प्यारी सी पहचान देखनी है। मुझे तेरे चेहरे पर अपनी मुस्कान देखनी है।..
आज रुठा हुआ इक दोस्त याद आया, अच्छा गुजरा हुआ कुछ वक्त बहुत याद आया।
मैं भी कभी हँसता, खेलता था….!! कल एक पुरानी तस्वीर में, देखा था खुद को.
डब्बे मे डब्बा डब्बे मे ब्रश उसकी ठरकी ज़िंदगी है , हर हफ्ते नया क्रश
~Mil Jaye Ager Fursat Toh Parhna Zaroor Mujhe, Nakaam Zindagi Ki Mukammal Kitaab Hun Meiin .. ‘
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