उस शाम तुमने मुड़कर मुझे देखा जब… यूँ लगा जैसे हर दुआ कुबूल हो गयी
हमको इतना बुरा भी ना समझो तुम…! दर्द लिखने की आदत है देने की नहीं…..!
Gul shaakh se bichrey to kahin ka nahin rehta, Tum khud ko juda meri zaat se kuch soch ke karna..
~ Khushii Walii Raat Neend Nahi Aati Aur Ghum Walii Raat Kaun Sota Haii .. ‘
कौन कहता है कि मुसाफिर ज़ख़्मी नहीं होते, रास्ते गवाह है बस गवाही नहीं देते.
पसंन्द आया तो दिल में , नही तो दिमाग में भी नही ।
अब तेरे बाद ……मेरा कौन बनेगा ….हमदर्द …..* मैंने अपने भी खो दिए…. तुझे पाने की….. ज़िद में…….*
एहसान जताना जाने कैसे सीख लिया.. मोहब्बत जताते तो कुछ और बात थी।
इक झलक जो मुझे आज तेरी मिल गयी मुझे फिर से आज जीने की वजह मिल गयी
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