शब्द “दिल” से निकलते हैं… “दिमाग”से तो उसके मतलब निकलते हैं…
टूट सा गया है मेरी चाहतो का वजूद…. अब कोई अच्छा भी लगे तो हम इजहार नहीं करते
धडकनों को कुछ तो काबू में कर ए दिल अभी तो पलकें झुकाई है मुस्कुराना अभी बाकी है उनका.
किसी को क्या बताये की कितने मजबूर है हम.. चाहा था सिर्फ एक तुमको और अब तुम से ही दूर Continue Reading..
*खुद बीमार होकर भी पूछती है तबीयत मेरी…* *माँ कमजोर है थोड़ी लेकिन मजबूत बड़ी है
~ Shikway To Buhat Hain ,Magar Shikayat Nahe Kar Sakta ~ ~ Mere Honton Ko Ijazat Nahe HaiUske Khilaf Bolne Continue Reading..
Main bahut Zalim Hun Aye Mere Dil.. . . Tujhe Hamesha Us Ke Hawale Kiya Jise TeRi Qadar Hi Nahi..
पर्दा गिरते ही खत्म हो जाते हैं तमाशे सारे, खूब रोते हैं फिर औरों को हँसाने वाले.
आज फिर हँस पड़ी मैं..और रो गया दिल..जब कहा उसने.. कि तुम जैसा गरीब सिर्फ शायरी ही कर सकता है..!!
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