बचपन में भरी दुपहरी नाप आते थे पूरा महोल्ला, 💗जब से डिग्रियाँ समझ में आई, पाँव जलने लगे
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भरने को तो हर ज़ख्म भर जाएँगे, कैसे भरेगी वो जगह जहां तेरी कमी होगी !!
बारिश और महोबत दोनों ही यादगार होते हे,❤ बारिश में जिस्म भीगता हैं और महोबत मैं आँखे.
सुनो एक अजीब सी चुभन होती है..!! जब मेरे सिवा कोई तुम्हारा नाम लेता है.
~ Roothi Agar Tujhse Toh Iss Andaaz Se Roothu’Gi, Ke Tere Shehr Ki Mitti Bhii Mere Wajood Ko Tarse’Gi .. Continue Reading..
*न जाने कैसी “नज़र” लगी है “ज़माने” की…* कमब्खत *”वजह”* ही नही मिलती *”मुस्कुराने”* की.
कुछ दस्तकें, नींद तोड़ने आती हैं और कुछ… सिर्फ दिल।
बुराई को खत्म करने निकले तो अच्छाई चार कदम ओर आगे निकल गई…
*यहां लोग अपनी गलती नहीं मानते* *किसी को अपना कैसे मानेंगे…
