बुराई को खत्म करने निकले तो अच्छाई चार कदम ओर आगे निकल गई…
बड़ी देर तक साथ जागे ये चाँद और मैं, वो सितारों के बीच तनहा था और मैं भीड़ में अकेला Continue Reading..
पहचान ना पाया तेरी हकीक़त को वक्त रहते। ये मेरी मोहब्बत थी या तेरे झुठ बोलने का हुनर
~देख जिँदगी तू हमे रुलाना छोड दे अगर हम खफा हूऐ तो तूझे छोड देँगे
Barish gire na gire sagar chalkta he tum milo na milo zindgi chalti rehti he
खुद के खोने का पता ही नहीं चला… , किसी को पाने की ‘इन्तहा’ कर दी मैंने….?
“दुखो के बोझ में ज़िन्दगी कुछ इस तरह डूबे जा रही हैं की मेरी हर एक चाहत, हर एक आस Continue Reading..
ना चंपा ना पारो आपना तो एक ही ऊसूल है हर लडकी पे लाईन मारो…
खेलने दो उन्हे जब तक जी न भर जाए उनका, मोहब्बत 4 दिन की थी… तो शौक कितने दिन का Continue Reading..
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *