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It’s Funny How your Parents Tell You
It’s Their House🏠
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But Soon As Something Needs Cleaning
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It Magically Becomes Yours Too

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जब अॉफिस की पुरानी मैडम ने चपरासी को *”ओए”* कह कर बुलाया,
तो नई मैडम को उस पर तरस आया..

कहा- “लोग जाने कहां से पढ़ कर आ जाते हैं,
भला *’ओए’* कहकर किसी को कभी बुलाते हैं ?”

बोली, “सुनो, मैं शिष्टाचार निभाऊंगी,
तुम्हें तुम्हारे नाम से ही बुलाऊंगी।”

चपरासी गदगद हो गया, बोला – “आप सरीखे लोगों का ही हम गरीबों को साथ है, मैडम जी मेरा नाम *’प्राणनाथ’* है।”

मैडम जी सकुचाई,
पलभर कुछ ना बोल पाई,
फिर कहा, “इस नाम से अच्छा न होगा तुम्हें बुलाना,
अगर कोई पुकारने का नाम हो तो बताना”

चपरासी बोला ,”मेरे घर में सब मुझे दुलारते हैं,
बीवी से लेकर अब्बा तक सब *’बालम’* कह कर पुकारते हैं।”

मैडम की समझ में कुछ न आया,
एक नया आईडिया लगाया,
बोली , “रहने दो, अब पहेलियां न बुझाओ,
मोहल्लेवाले तुम्हें क्या कहते हैं ये बताओ”

बोला, “मैडम जी, सबका हम दिल बहलाते हैं,
और मोहल्ले में *’साजन’* कहलाते हैं।”

मैडम अब तक ऊब चुकी थी,
ऊहापोह में डूब चुकी थी,
कहा “मुए, ये सब नाम कहां से लिए जाएंगे,
तू ‘सरनेम’ बता उसी से काम चलाएंगे।”

बोला, “मैडम जी क्या करूं,
दुनिया का सब ‘गेम’ है,
आप ‘सरनेम’ से बुलाइए,
*’स्वामी’* मेरा ‘सरनेम’ है”

अब मैडम झल्लाई,
जोरों से चिल्लाई ,
” *’ओए’* मेरा सिर मत खा,
एक कप गरम चाय ले के आ “

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खन्ना साहब रोज अॉफिस से घर लेट पहुंचते..

पत्नी जब भी फोन करती बस एक ही जवाब मिलता – “आई एम अॉन द वे.. “😒

काफी छानबीन के बाद पता चला खन्ना साहब की सेक्रेटरी का सरनेम….
द वे है

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सांता : यार, इसका क्या मतलब होता है.. “आई एम गोइंग..?”

दोस्त : मैं जा रहा हूं..!!
सांता : साले, ऐसे कैसे चला जाएगा…
20 और भी सुबह से जा चुके हैं, आंसर बता के जा..!!

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पत्नी: टोस्ट पर शहद लगा दूँ, खाओगे ?

पति, स्टाइल मारते हुए: शहद! मधुमक्खी के मुँह से निकलता है।
नहीं, मैं किसी के मुँह से निकली हुई चीज़ नहीं खाता

पत्नी: तो फिर अंडा बना दूँ ?

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मित्रो,
अब इससे अच्छे दिन कहाँ से लाऊँ….
.
आज एक इंसान
पत्नी
के साथ
खुलेआम
मार्किट में
घूम सकता है…..
.
वो भी,
बिना पैसे खर्च किये….

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30 दिन से बिना बताये घर से गायब एक राजस्थानी पति घर लौटा😡

पत्नी – मैं थारे गम में बीमार पड़ी थी, जै मैं मर जाती तो 😐

पति~तो मैं कोण सा श्मशान की चाबी अपणे साथ ले ग्या था

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अब तक का सबसे पोजेटिव जोक

“Wife -मैं आपसे बात नहीं करूंगी।

Husband -ठीक है!

Wife – क्या तुम कारण नहीं जानना चाहते?

Husband -नहीं मैं तुम्हारे फैसले की इज्जत करता हूं”

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Husband ने saturday को ऑफिस बैठे बैठे facebook पे post किया….
“पंछी बन के उड़ता फिरूँ मस्त गगन में….”
तभी wife का comment आया….
“धरती छूते ही धनियाँ ले आना,
अपने भवन में…

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You know you will never win if the security guard say
“💁‍♂️Kodwa mshana umthetho awuvumi ”

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Ikunyise i relationship uzithole sewu citha iimpahla u eneka amanzi…

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I was dancing the Thuso Phala dance this past long weekend then i heard someone saying ‘hela monna otswa amanzi…’

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A love bite from a Xhosa girl it feels like
you have been bitten by a Black Mamba…
Iyooo wena very painful..

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Nowadays only few girls are wife materials👰😍….!
But guys of today are trying to
turn water into wine (bitches to wives)

You are not Jesus!!!!

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Ama relationship ayafana nezitulo zasemholweni ngoba nj uphuma yochama uthole sekhlezi omuny

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समस्या – *”बेटा, मेरी बहुएं मेरा कहना नहीं सुनती। सलवार सूट और जीन्स पहन के घूमती हैं। सर पर पल्ला/चुनरी नहीं रखती और मार्किट चली जाती हैं। मार्गदर्शन करो कि कैसे इन्हें वश में करूँ…”*

*समाधान* – आंटी जी चरण स्पर्श, पहले एक कहानी सुनते हैं, फिर समस्या का समाधान सुनाते हैं।

“एक अंधे दम्पत्ति को बड़ी परेशानी होती, जब अंधी खाना बनाती तो कुत्ता आकर खा जाता। रोटियां कम पड़ जाती। तब अंधे को एक समझदार व्यक्ति ने आइडिया दिया कि तुम डंडा लेकर दरवाजे पर थोड़ी थोड़ी देर में फटकते रहना, जब तक अंधी रोटी बनाये। अब कुत्ता *तुम्हारे हाथ मे डंडा देखेगा और डंडे की खटखट सुनेगा तो स्वतः डर के भाग जाएगा रोटियां सुरक्षित रहेंगी*। युक्ति काम कर गयी, अंधे दम्पत्ति खुश हो गए।

कुछ वर्षों बाद दोनों के घर मे सुंदर पुत्र हुआ, जिसके आंखे थी और स्वस्थ था। उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा किया। उसकी शादी हुई और बहू आयी। बहु जैसे ही रोटियां बनाने लगी तो लड़के ने डंडा लेकर दरवाजे पर खटखट करने लगा। बहु ने पूँछा ये क्या कर रहे हो और क्यों? तो लड़के ने बताया ये हमारे घर की परम्परा है, मेरी माता जब भी रोटी बनाती तो पापा ऐसे ही करते थे। कुछ दिन बाद उनके घर मे एक गुणीजन आये, तो माज़रा देख समझ गए। बोले बेटा तुम्हारे माता-पिता अंधे थे, अक्षम थे तो उन्होंने ने डंडे की खटखट के सहारे रोटियां बचाई। लेकिन तुम और तुम्हारी पत्नी दोनों की आंखे है, तुम्हे इस खटखट की जरूरत नहीं। *बेटे परम्पराओं के पालन में विवेक को महत्तव दो*।

आंटीजी, *इसी तरह हिंदू स्त्रियों में पर्दा प्रथा मुगल आततायियों के कारण आयी थी*, क्योंकि वो सुंदर स्त्रियों को उठा ले जाते थे। इसलिए स्त्रियों को मुंह ढककर रखने की आवश्यकता पड़ती थी। सर पर हमेशा पल्लू होता था यदि घोड़े के पदचाप की आवाज़ आये तो मुंह पर पल्ला तुरन्त खींच सकें।”

अब हम स्वतन्त्र देश के स्वतन्त्र नागरिक है, राजा का शासन और सामंतवाद खत्म हो गया है। अब स्त्रियों को सर पर अनावश्यक पल्ला और पर्दा प्रथा पालन की आवश्यकता नहीं है।

घर के बड़ो का सम्मान आंखों में होना चाहिए, बोलने में अदब होना चाहिए और व्यवहार में विनम्रता छोटो के अंदर होनी चाहिए।

सर पर पल्ला रखे और वृद्धावस्था में सास-ससुर को कष्ट दे तो क्या ऐसी बहु ठीक रहेगी?

आंटीजी पहले हम सब लकड़ियों से चूल्हे में खाना बनाते थे, लेकिन अब गैस में बनाते है। पहले बैलगाड़ी थी और अब लेटेस्ट डीज़ल/पेट्रोल गाड़िया है। टीवी/मोबाइल/लैपटॉप/AC इत्यादि नई टेक्नोलॉजी उपयोग जब बिना झिझक के कर रहे हैं, तो फिर बहुओं को पुराने जमाने के हिसाब से क्यों रखना चाहती है? नए परिधान यदि सभ्य है, सलवार कुर्ती, जीन्स कुर्ती तो उसमें किसी को समस्या नहीं होनी चाहिए। जब बेटियाँ उन्ही वस्त्रों में स्वीकार्य है तो फिर बहु के लिए समस्या क्यों?

आंटी जी, “परिवर्तन संसार का नियम है”। यदि आप अच्छे संस्कार घर में बनाये रखना चाहते हो तो उस सँस्कार के पीछे का लॉजिक प्यार से बहु- बेटी को समझाओ। उन्हें थोड़ी प्राइवेसी दो और खुले दिल से उनका पॉइंट ऑफ व्यू भी समझो।

बहु भी किसी की बेटी है, आपकी बेटी भी किसी की बहू है। अतः घर में सुख-शांति और आनन्दमय वातावरण के लिए *जिस तरह आपने मोबाइल जैसी टेक्नोलॉजी को स्वीकार किया है वैसे ही बहु के नए परिधान को स्वीकार लीजिये। बहु को एक मां की नज़र से बेटी रूप में देखिए, और उससे मित्रवत रहिये।*

*”सबसे बड़ा रोग- क्या कहेंगे लोग”*, इससे बचिए, क्योंकि जब आपको सेवा की जरूरत होगी तो लोग कभी उपलब्ध न होंगे। आपको *’बेटे-बहु’* ही चाहिए होंगे।

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