में किसी ओर का नहीं हु फिलहाल
.. कोई तो मेरी हो जाओ
इक तो नहीं सजन मेरे पास नही रे… दूजे मिलन दी कोई आस नही ऱे….
बिछड़ों को मिलाते मिलाते न जाने किसकी नज़र लग गयी, की आज हमें मिलाने वाला कोई नहीं है।
मिट जाते है औरों को मिटाने वाले . लाश कहा रोती है, रोते है जलाने वाले
Band muthhi se girti hui rait ki manind … Bhula dia na tum ne mujhe zarra zarra kr k
अब सज़ा दे ही चुके हो तो मेरा हाल ना पूछना, अगर मैं बेगुनाह निकला तो तुम्हे अफ़सोस बहुत होगा…
~ बड़ा अजीब सा जहर था उसकी यादों का सारी उम्र गुजर गयी मरते – मरते .. ^
Chup chap chal rahay thay safar-e-hayat mein Tum pe nazar pari to, gumrah se ho gaey.
यार वो लम्हा भी कितना खास होगा…. जब तू सिर्फ और सिर्फ मेरे साथ होगा..!!
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