जो मेरी आँखो मे पलको पे रहता था, आज काजल लगाया तो बहुत याद आया।
वो रोटी चुरा के चोर हो गया. . . लोग मुल्क खा गए, कानून लिखते लिखते.
Ye Bary Dukh Ki Bat Hai K Ab Hamara Aik Dusray K Dukh Se Koi Wasta Nahi Raha Hai…
कोई तो होगा टूटा हुआ मेरी तरह ही… जो जुड़ने की ख्वाहिश लिए जी रहा होगा अकेला कही..*
Meiin Woh Shaam Nahi Jo Guzar Jaugii, Hoon Sard Si Raat Meiin Guzarugii Lekiin Thehar Thehar Kay ..
याद रहेगा ये दौर-ए-हयात हमको, क्या खूब तरसे हैं जिन्दगी में एक शख्स के लिए ।।
सिलसिला ये चाहत का दोनो तरफ से था, वो मेरी जान चाहती थी और मैं जान से ज्यादा उसे।
मैं खुल के हँस तो रहा हूँ फ़क़ीर होते हुए , वो मुस्कुरा भी न पाया अमीर होते हुये ।।
तुम से बिछड के फर्क बस इतना हुआ … तेरा गया कुछ नहीँ और मेरा रहा कुछ नहीँ…!
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