*यहां लोग अपनी गलती नहीं मानते* *किसी को अपना कैसे मानेंगे…
नींद तो बचपन में आती थी अब तो mobile को rest देने के लिए सो जाते हैं
~Uljhe Huye Hai Apni Uljhone Meiin Ajkal, Tum Yeh Na Samjhana Ke Ab Woh Chahat Na Rahii..
यूं तो लग जाती है बद्दुआ भी किसी की, वक्त रहते दुआ मांग कर देखिए जरा
निग़ाहों में अभी तक दूसरा कोई चेहरा ही नहीं आया.. !! भरोसा ही कुछ ऐसा था,तेरे लौट आने का…!!
मंजूर थे हमें वक्त के सारे सितम मगर…. तुमसे बिछड़ कर जी लेना ~ सज़ा ज़रा ज्यादा हो गई !
~ Suno Sahib Khatam Sirf Rishety Kiye Jate Haii Mohabbat Nahii .. ‘
जो मेरी आँखो मे पलको पे रहता था, आज काजल लगाया तो बहुत याद आया।
जैसे जैसे उम्र गुजरती है एहसास होने लगता है कि माँ बाप हर चीज़ के बारे में सही कहते थे
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