अजीब दस्तूर है मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है टूट कोई जाता है..
एक तो कातिल सर्दी, ऊपर से तेरी यादो की धुंध, बेहाल कर रखा है इश्क मे मौसमो ने भी।….
किसी और का हाथ कैसे थाम लूँ…. वो तन्हा मिल गयी कभी तो क्या जवाब दूँगा…..!!
दूर उन्हें जाना था ये …. एहसास तो था लेकिन……!!* *बिछड़ना इस कदर होगा …..ये ख्याल ना आया …..
मोहब्बत हो या काला धन….. छुपाकर रखोगें तो नुकसान खुद का ही है..
गिन लेती है दिन बगैर मेरे गुजारें हैं कितने भला कैसे कह दूं कि “माँ” अनपढ़ है मेरी।।
साजन कोई वकील मुझे ऐसा करा दे,, जो हारा हुआ प्यार मुझे फिर से जिता दे।।
ज़िन्दगी इतनी मुश्किल इसलिए है, क्यूंकि लोग आसानी से मिली चीज की कीमत नहीं जानते !!
परेशानी का कोई पैमाना नही होता साहब| मै तो ये सोचकर भी परेशान हो जाती हूँ कि कमिटी(committee) की स्पेलिंग Continue Reading..
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *