अजीब दस्तूर है मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है टूट कोई जाता है..
Ye wajbaat_e_ishQ hum pe hi Qarz kyu …?? Wo bhi adaa kry k muhabbat usy bhi thi …
दुश्मन के सितम का खौफ नहीं हमको, हम तो दोस्तो के रूठ जाने से डरते है !
तलाश कर मेरी कमी को अपने दिल में एक बार; दर्द हो तो समझ लेना मोहब्बत अभी बाकी है!
कभी वक्त निकाल के हमसे बातें करके देखना.. हम भी बहुत जल्दी बातों मे आ जाते है…
~Humari Kashtiyaan To Be-Yaqeeni K Bhanwar Main Hain, Chalo Acha Kiya Hum Se Kinaara Kr Lyia Tum Ne .. ^
क्या करामात है कुदरत का जिन्दा इँसान पानी मे डुब जाता है और मुर्दा तैर के दिखाता है
कितना समेटे खुद को बार बार, टूट के बिखरने की भी सीमा होती है ||
इतनी चाहत से ना देखा कीजिए महफिल मे आप . आप के शाहर वालो से दुशमनी बढ जाएगी
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