भरोसा तो अपनी साँसों का भी नही है, और हम इंसानो पर करते है
Badal gae hain ab hum dono …! Na woh manti hai , na mai roht’ta Hun …!!!
अपना परिचय अगर खुद देना पड़े, तो समझ लीजिये कि सफलता अभी दूर है..!
यकीन नहीं होता फिर भी कर लेता हूँ…!!! . . जहाँ इतने हुए..एक और फरेब हो जाने दो…!!!
है ये मेरी बदनसीबी तेरा क्या कुसूर इसमें, तेरे ग़म ने मार डाला मुझे ज़िन्दग़ी से पहले…..!!!
ना तुझको खबर हुई ना ज़माना समझ सका, हम तुझ पर, चुपके-चुपके से कई बार मर गये..
कितना अच्छा होता…तुम जो मतलबी होते… और तुम्हें सिर्फ….मुझसे ही मतलब होता…
हज़ारो मैं मुझे सिर्फ़ एक वो शख्स चाहिये जो मेरी ग़ैर मौजूदगी मैं मेरी बुराई ना सुन सके !!
Apni halat ka khud ehsaas nahi h mujhko maine auro se suna hai ki pareshan hu mein.
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