लड़कियाँ खिलौना नही होती… जनाब.. पिता तो यूँ ही प्यार से गुड़िया कहते हैं
~Woh Ek Shakhs Zindagi Jaisa, Aur Woh Hii Merii Zindagi Mein Nahi ..’
भूले हैं रफ्ता-रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हम, किश्तों में खुदकुशी का मज़ा हम से पूछिए.
” मेरी हस्ती को तुम क्या पहचानोगे, हजारो मशहूर हो गए मुझे बदनाम करते करते ” l
इक झलक जो मुझे आज तेरी मिल गयी मुझे फिर से आज जीने की वजह मिल गयी
जिन आंखो को “सजदे” मे रोने की आदत हो* *वो आंखे कभी अपने “मुक्कदर” पे रोया नही करती*
आखिर कैसे भुला दे हम उन्हें…. मौत इंसानो को आती है यादो को नहीं……!!
Uske Har Sapne Ko Puraa Karne Ki Zidd Thi Meri, Usney Aazadi Mangi Aur Mainey Khud Ko Mittaa Diyaa…!!!
बेशक तू बदल ले अपनी मौहब्बत लेकिन ये याद रखना,, तेरे हर झूठ को सच मेरे सिवा कोई नही समझ Continue Reading..
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