लड़कियाँ खिलौना नही होती… जनाब.. पिता तो यूँ ही प्यार से गुड़िया कहते हैं
हम बने ही थे तबाह होने के लिए.. तेरा छोड़ जाना तो महज़ इक बहाना था.
मजबुरीयां तुमहारी थी और देख …!! तनहा हम हाे गऐ
तहजीब देखता हूँ मैं गरीबों के घर में दुपट्टा फटा हो फिर भी सर पर होता है
Aa Rahi Hai Fiza Main Dheemi Dheemi Si Mehak Lgta Hai Wo Meri Yad Main Sans Le Raha Hai..
Chup chap chal rahay thay safar-e-hayat mein Tum pe nazar pari to, gumrah se ho gaey.
बड़ी हिम्मत दी उसकी जुदाई ने मुझे, अब ना किसी को खोने का डर, ना पाने की चाहत।
इतनी बेरुखी ना करो कुछ तो रहम करो, तुम पर मरते हैँ तो क्या मार ही डालोगे…
कैसे करूँ मैं साबित…कि तुम याद बहुत आते हो… एहसास तुम समझते नही…और अदाएं हमे आती नहीं…
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