हम सा काहिल न मिलेगा कहीं खुद ख्वाहिशें हमसे तंग सजन
भुलने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता,.. मैंने नहीं मेरे दिल ने चुना है तुम्हे
हमारे कत्ल के लीऎ तो मीठी जुबांन ही काफी है… अजिब शक्स थे वो जो खंजर तलाश रहे थे..!
Chalo bikharne dete hai zindagi ko Sambhaalne ki bhi to ek hadd hoti hai.
न रुकी वक़्त की गर्दिश और न ज़माना बदला……!! . . पेड़ सूखा तो परिन्दों ने ठिकाना बदला……!!
यही सोच कर उसकी हर बात को सच मानते थे, के इतने खुबसूरत होंठ झूठ कैसे बोलेंगे.
हम क्यों ग़म करें गर वो हमें ना मिले.. अरे ! ग़म तो वो करें जिसे हम ना मिले…
JiSki nazron mein hum nhi ache….. Kuch toh woh app bhi bUre honge…
ज़िंदगी भर मौत के लिए दुआ करते रहे खुद से.. और जब जीना चाहा तो दुआ क़बूल हो गई…!!
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