बहुत सौचकर आज खुद से ये सवाल किया मैने, . . ऐसा क्या है मुझमे के लोग मुझसे वफा नही करते… .
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पाना है मुक्काम ओ मुक्काम अभी बाकी है अभी तो जमीन पै आये है असमान की उडान बाकी है !
ye dil bhi kiya ajeeb cheez hai… wahan hi jhukta hai jahan qadar nahi hoti
रखते थे जो मरने कि बात पे मेरे होठों पे उगंलीया अफसोस वही मेरे कातिल निकले
हजारों गम हो फिर भी मैं खुशी से फूल जाता हूँ… जब हंसती मेरी मां, मैं हर गम भूल जाता Continue Reading..
माँ ने रख दी आखिरी रोटी भी मेरी थाली में मै पागल फिर भी खुदा की तलाश करता हूँ !
खफा रहने का शौख भी पूरा कर लो लगता है तुम्हे हम ज़िंदा अच्छे नही लगते..
हर बार किस्मत को दोष देना अच्छी बात नही कभी-कभी हम भी हद से ज्यादा माँग लेते है
Glti meri hi thi vo pappi pappi mangti rhi or me kutte ka bachaa dhundta RHA……..
