मेरी दास्ताँ-ए-वफ़ा बस इतनी सी है, उसकी खातिर उसी को छोड़ दिया…
छोटे थे तो सब नाम से बुलाते थे, बड़े हुए तो बस काम से बुलाते है
-Be’Dard Zamany Ka Bahana Sa Bana Kar, Hum Toot Key Roty Hain Teri Yaad Me Aksar .. ‘
मोहब्बत थी, तो चाँद अच्छा था..! उतर गई, तो दाग भी दिखने लगे..
एक ही समानता है पतंग औऱ जिन्दगी मॆं.. ऊँचाई में हो तब तक ही वाह-वाह होती हैं!!
तु मिल गई है ताे मुझ पे नाराज है खुदा, कहता है की तु अब कुछ माँगता नहीं है..!!
मोहब्बत यूँ ही किसी से हुआ नहीं करती…. अपना वजूद भूलाना पडता हैकिसी को अपना बनाने के लिए…।
..जब था तो बहुत पुख्ता था , एक शख़्स से रिश्ता…. ….टुटा है , तो अब टुकड़े संभाले नहीं जाते…
में खुश हूँ कि उसकी नफरत का अकेला वारिस हूँ वरना मोहब्बत तो उसे कई लोगो से है…..
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