मेरी दास्ताँ-ए-वफ़ा बस इतनी सी है, उसकी खातिर उसी को छोड़ दिया…
तुम साथ हो तो मुकद्दर पे हकुमत हैं अपनी। बिन तेरे ज़िन्दगी की औकात ही क्या हैं।।
कमाल की मोहब्बत थी उसको हमसे, अचानक ही शुरू हुई और बिन बतायें ही ख़त्म.
Nazdeek Ho Kar Bhi Woh Itna Door Hai Mujh Sy, Ishara Ho Nahi Sakta, Pukara Ja Nahi Sakta..
मौत भी अजीब चीज़ है मरने के लिये साली पूरी ज़िन्दगी जीनी पड़ती हे….
कितना समेटे खुद को बार बार, टूट के बिखरने की भी सीमा होती है ||
दिल जहाँ ले जाये दिल के साथ जाना चाहिए, क्योंकि दिल से बढ़कर कोई रहनुमा नहीं होता.
Pehli mulaqat thi aur hum dono hi bebas the, wo zulfien na sambhal sake aur hum khud ko..!!
सारी उम्र मैं जोकर सा बना रहा, तेरे पीछे जिंदगी सर्कस हो गयी।
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