हम सादगी में झुक क्या गए , तुमने तो हमे गिरा हुआ ही समझ लिया
चेहरे अजनबी हो भी जायें तो कोई बात नहीं लेकिन, रवैये अजनबी हो जाये तो बड़ी तकलीफ देते हैं…….!!
शायद कोई तो कर रहा है हमारी कमी पूरी…. तभी तो उन्हें हमारी याद नही आती !
ना जाने क्यों मुझे लोग मतलबी कहते है एक तेरे सिवा दुनियां से मतलब नहीं मुझे।
हम बने ही थे तबाह होने के लिए.. तेरा छोड़ जाना तो महज़ इक बहाना था.
ये दरिया-ए-अफसाना कभी ख़त्म ही नही होता ना तुम आते ना ये यादों का कारवां ही ख़त्म होता….
सोया रहा नसीब एक अरसे तक, जागने पर जरूरत सी खत्म हो गई अब
समजने समजाने मे ही गुजर गई तू,😓 ए जिन्दगी तूजे एकबार भी जी न पाए हम.
कई रिश्तो को परखा तो नतीजा एक ही निकला…, जरूरत ही सबकुछ है, मुहब्बत कुछ भी नहीं..
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *