Dard dilon ke kam ho jaate… Main aur Tum agar hum ho jaate
Ye Bary Dukh Ki Bat Hai K Ab Hamara Aik Dusray K Dukh Se Koi Wasta Nahi Raha Hai…
चेहरे पर जो अपने दोहरी नकाब रखता हैं, खुदा उसकी चलाकियों का हिसाब रखता हैं
बहुत दिन हो गए ‘मुहब्बत’ लफ्ज़ सुन सुनकर मुझे…. कल ‘बेवफ़ा’ सुना तो तरी बहुत याद आई मुझे….
शुक्र है हँसी बाजार में नहीं बिकती साहब, वरना लोग गरीबों से यह भी छीन लेते
तहजीब देखता हूँ मैं गरीबों के घर में दुपट्टा फटा हो फिर भी सर पर होता है
किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो, रूह को जिस्म से लेने फ़रिश्ते नहीं आते..!!
*खामोशी से बनाते रहो पहचान अपनी..* *हवाएँ ख़ुद गुनगुनाएगी नाम तुम्हारा..!!*
अब तो इतवार में भी कुछ यूँ हो गयी है मिलावट छुट्टी तो दिखती है पर सुकून नजर नहीं आता
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