ਬਚਪਨ ਚ ਭੂਤਾਂ ਦੇ . . .
ਜਵਾਨੀ ਚ ਮਸ਼ੂਕਾਂ ਦੇ . . .
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ਬੁਢਾਪੇ ਚ . .?
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ਜਮਦੂਤਾਂ ਦੇ ਸੁਪਨੇ ਬੰਦੇ ਨੂੰ ਹਰ ਵੇਲੇ
ਦੁਖੀ ਕਰੀ ਰੱਖਦੇ ਆ
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ਬਚਪਨ ਚ ਭੂਤਾਂ ਦੇ . . .
ਜਵਾਨੀ ਚ ਮਸ਼ੂਕਾਂ ਦੇ . . .
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ਬੁਢਾਪੇ ਚ . .?
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ਜਮਦੂਤਾਂ ਦੇ ਸੁਪਨੇ ਬੰਦੇ ਨੂੰ ਹਰ ਵੇਲੇ
ਦੁਖੀ ਕਰੀ ਰੱਖਦੇ ਆ
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ਮੇਨੂੰ ਕਹਿੰਦੀ ਨਵੇ ਸਾਲ ਤੇ ਕੀ
ਲੈਕੇ ਦਉਗੇ??
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ਮੈ ਕਿਆ 2018 ਦਾ ਕਲੰਡਰ
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एक महिला पंजाबी मे बोलते हुऐ एक हरियाणवी की किराना दुकान पर चाय पत्ती खरीदने गई .
महिला – लिपटण दी चाह है?
हरियाणवी दुकानदार – मन्ने तो ना है….तन्ने है तो लिपट जा .
😂😂😂
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दंगल मूवी देख के एक बात समझ आयी कि बबिता फोगाट की कोई achievement थी ही नही …
सारी कुश्ती तो गीता फोगाट ही करती थी
और बबिता का काम हर मैच में बैठ के “चाल गित्ता” चिल्लाना होता था !
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ਕੁੜੀ ਨੇ ਪਿਆਰ ਨਾਲ ਆਪਣੇ boyfriend
ਦੇ ਸੀਨੇ ਉੱਤੇ ਆਪਣਾ ਸਿਰ ਰੱਖਿਆ ਅਤੇ ਬੋਲੀ :
ਜਾਨੂੰ ਤੁਹਾਡਾ ਦਿਲ ਕਿੰਨਾ ਕੁਰਕੁਰਾ ਹੈ . . . .
ਮੁੰਡਾ : ਓਏ ਸ਼ੁਦਾਇਣ , ਦਿਲ ਕੁਰਕੁਰਾ ਨਹੀਂ ਆ ,
ਬੀੜੀ ਦਾ ਬੰਡਲ ਰੱਖਿਆ
ਆ ਜੇਬ ਚ ।
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देश बदल रहा है गुजरात चुनाव दो घंटे म्ह 11% वोटिंग ~
दुल्हा – दुल्हन नै भी पहल्यां वोट का अधिकार जरुरी समझा, शादी की रस्म बाद म्ह
वहीं 98 साल का बुजुर्ग भी जाड्डा म्ह शुरू कै एक घंटे म्ह बोट डाल कै घर जा लिया
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एक डाब्बे पै छोटू चाय लेकै आया अर आंगली चाय के गिलास मैं डुबो रया था …
गाहक छोह मैं आ गया … अरै यो के है रै …
छोटू बोल्या … जी हमरा उंगली में चोट लगा था दर्द कर रहा था इसलिए गरम चाय में डुबो दिए आराम मिलता है …
गाहक का पारा हाई हो ग्या … साले अराम तांई मेरिए चाय पाई थी … आंगली अपणे चुतड़ां मैं दे लेंदा …
छोटू भोलेपण तै बोल्या … जी बाऊ जी वंही दिए थे पर आपका चाए लाणे के लिए निकालना पड़ा
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ब्रेकिंग न्यूज ::- आज शहर में एक दिल दहला देने वाली हृदय विदारक घटना घटित हुई …
कुछ व्यापारी एक जाने माने होटल में एक दोस्त के जन्म दिन की पार्टी में पीते हुए नाच कूद रहे थे …
तभी कोई आसामाजिक शरारती तत्व जोर से चिल्लाया …. मितरोंooo
ये सुनते ही दो व्यापारियों के हाथ से शराब का गिलास छूट गया एक व्यापारी को हार्ट अटैक आते आते बचा … फिर सब व्यापारी मुह लटका के बैठ गए … 😏😏😏
बस रै मितरों मैए … अर जे आग्गै भाइयोरबैनोंooo बी बोल देंदा तो के बन्दा थारा
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बाब्बू का वाटर हीटर … 😅😅😅
तड़की बाब्बू लट्ठ लेकै खड़या होग्या अक आज तूं ठंडे पाणी गैल नहावैगा गात मैं फुर्ती आई रै सारा दन …
मखा बाब्बू रिस्तेदार बी बुलाले अंतिम किरया करम बी करणा पड़ सकै है …
बाब्बू नै वाए लट्ठ दिया कड़ मैं घुमा कै … बस फेर के उस लट्ठ की गरमी इतनी अत्याअधिक थी यारां नै पाणी की ठंडक महसूस ए ना होई .
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आख़िर क्या कारण था कि मुंबई के ताज होटल पर हुए भीषण हमले में ताज होटल का कोई भी कर्मचारी अपनी ड्यूटी छोड़कर और होटल छोड़कर नहीं भागा ??
26/11 मुंबई अटैक. यानी 26 नवंबर 2008 को मुंबई में आतंकी हमला हुआ. तीन हथियारबंद आंतकियों ने मुंबई के ताज होटल समेत कई जगहों पर हमला किया. अब भी होटल ताज की वो दहशत में डूबी तस्वीरें ताजा हैं. मगर 26/11 के दौरान होटल ताज में जो लोग फंसे रहे, वो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक विषय बन गए. इस स्टडी में कई चौंकाने वाले फैक्ट्स सामने आए हैं.
बुधवार का दिन था. 500 के करीब गेस्ट रुके हुए थे और करीब इतने ही बैंक्वेट हॉल्स में अलग-अलग फक्शन अटैंड कर रहे थे. रात को 9 से 9.30 बजे के बीच अचानक गोलीबारी की आवाज़ें आईं. किसी को पता नहीं चल रहा था कि आखिर ये कैसी आवाज़ है. करीब 600 कर्मचारी भी थे उस वक्त होटल ताज में.
24 साल की बैंक्वेट मैनेजर मल्लिका जगद उस समय गेस्ट को संभाल रहीं थीं.
रिसर्च में सामने आया कि कर्मचारियों में ज्यादातर 25 से 30 साल के थे. उनको पता था कि कौन सा दरवाज़ा कहां है और कहां से खुलता और बंद होता है. साथ ही कैसे बाहर निकला जा सकता है. इंसानी फितरत होती है कि मुश्किल के समय अपनी जान बचाकर भागा जाए. वो कहते भी तो हैं -जान बची तो लाखों पाए. मगर हैरानी की बात ये है कि उस हमले के दौरान होटल ताज का एक भी कर्मचारी भागा नहीं. अंदर फंसे होटल स्टाफ ने मेहमानों को अपनी जान पर खेलते हुए बचाया.
इनमें टेलीफोन ऑपरेटर्स भी शामिल थीं. ये फीमेल स्टाफ ही था जो पहले बाहर निकला और फिर इमरजेंसी की सिचुएशन में वापस अपने वर्क स्टेशन पर आ गया. उन्होंने होटल के हर कमरे में गेस्ट को फोन किया और बताया कि वो अपने-अपने रूम की लाइट बंद कैसे करें. ऑपरेटर्स पूरी रात अंदर ही रहे और लगातार गेस्ट की सेफ्टी के लिए उन्हें जानकारियां देते रहे.
होटल के छठे माले पर शेफ ने गेस्ट को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक दूसरे के हाथ से हाथ जोड़कर एक ह्यूमन चेन बना ली. गेस्ट को बीच में रखकर सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की. इतने में दो आतंकवादी सामने आ गए और कई शेफ को मौके पर ही गोली मार दी.
इस पर रिसर्च करते हुए मनोवैज्ञानिक ने तीन नतीजे निकाले-
#1 ताज ग्रुप ने अपने होटल में बड़े शहरों से नहीं बल्कि छोटे कस्बों से लोगों को नौकरी पर रखा था. ये सामने आया कि आज भी छोटी जगहों से आए लोग एक-दूसरे से जुड़ाव महसूस करते हैं.
#2 दूसरा निष्कर्ष ये निकला कि ताज ने किसी भी टॉपर यानी क्लास में सबसे ज्यादा मार्क्स लेने वाले को नौकरी पर नहीं रखा था. एचआर टीम यानी ह्यूमन रिसोर्स ने नौकरी के लिए छांटे गए लोगों के स्कूल टीचर्स से बात की थी और जाना था कि आवेदक अपने पैरेंट्स, टीचर्स और आसपास के लोगों के साथ किस तरह का बर्ताव करता था. यानी एटीट्यूड चेक किया न कि मार्क्स.
#3 तीसरी और आखिरी बात ये निकलकर आई कि ताज ने अपने कर्मचारियों को सिखाया था कि वो ताज ग्रुप के लिए उनके मेहमानों के प्रतिनिधि होंगे, न कि मेहमानों के लिए ताज के प्रतिनिधि. सभी फ्रंट डेस्क कर्मचारियों को गेस्ट की आवाज बनने की ट्रेनिंग दी गई. एक और बात जो इसी से जुड़ी है. ताज में ये कल्चर है कि कोई भी गेस्ट जब किसी कर्मचारी के लिए अच्छा रिमार्क लिखकर जाता है तो मैनेजमेंट उस कर्मचारी को 24 घंटों के भीतर इनाम देता है.
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घरवालोँ को टेँशन रहती हे कि लडकी
Facebook पर लडका पसन्द ना कर ले।
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पर उनको ये पता नहीँ रहता यहां उसने ट्रक भरकर भाई बना लिये।
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कल मै पडोसी के घर प्रेस मांगने गया, मैने कहा कपडे
प्रेस करने थे
वो बोला इधर आकर कर जाओ, और मै कर आया
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आज पडोसी मुझसे झाडू मांगने आया, बोला घर झाडू
लगानी थी, मैने कहा इधर आकर लगालो
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वो बुरा मान गया मैने कुछ गलत कह दिया
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लड़की ने
प्यार से लडके के
सीने पर अपना सर
रखा और बोली :
जानू, आपका दिल कितना कुरकुरा है….
लडका: अरे पगली, दिल कुरकुरा नहीं है,
बीड़ी का बंडल रखा
है जेब मे ।
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अगर Tv विज्ञापनों की मानें तो कमरदर्द
हमेशा खूबसूरत महिलाओं को ही होता है
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टीचर – “ख़ुशी का ठिकाना ना रहा”
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इस मुहावरे का क्या मतलब है ?
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पप्पू – ख़ुशी घर वालों से छिपकर
रोजाना अपने बॉयफ्रेंड से मिलने जाती थी
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एक दिन उसके पापा ने बॉयफ्रेंड के साथ देख लिया
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और ख़ुशी को घर से निकाल दिया
अब बेचारी “ख़ुशी का ठिकाना ना रहा”
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टीचर बेहोश
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अभी मैंने खुद को शीशे में देखा तो
पता चला कि
दुनिया में मासूम लोग
आज भी ज़िंदा हैं
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