Ek tera noor hi kaafi h.. Sare jhaa ki roshni k liye
छोड़ना आसान होता है लेकिन भूलना नही
मै तुम्हारी वो याद हूँ.. जिसे तुम अक्सर भुल जाते हो…..
कोई नहीं बचाकर रखना चाहता है यादें जान से प्यारे खत बेरुखी से जलने लगे हैं !!
आँखों के अंदाज़ बदल जाते हैं जब कभी हम उनके सामने जाते हैं
मेरे साथ बैठ कर वक़्त भी रोया एक दिन बोला बन्दा तू ठीक है मैं ही ख़राब चल रहा हूँ
छोड़ भी दूँ तो कैसे, मै फ़्लर्ट करना… किसी की जान बसती है, फ़्लर्ट में मेरी.
~Tum Jo Kehte The Acha Haii Zamana Hum Se, Ye Batao K Mila Koi Hamarey Jaisa .. ?
मीठी यादों के साथ गिर रहा था, पता नहीं क्यों फिर भी मेरा वह आँसु खारा था.
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