एक मशविरा चाहिए, ख़ुदकुशी करूं या इश्क..
अब तेरी याद के साथ मेरा हरपल ख़ास है, तू पास नहीं है इसलिए दिल थोडा उदास है
सोचता हूँ बेच डालूं …. मेरे सब उसूल अब पुराने हो गए हैं !!
कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से कहीं भी जाऊँ मेरे साथ-साथ चलतें हैं
हमारी तलाश, तेरी लाश पे आके खत्म होगी..
कहीं ज़िद पूरी, कहीं जरूरत भी अधूरी… कहीं सुगंध भी नहीं, कहीं पूरा जीवन कस्तूरी…!!
वो बड़े घर की थी साहब, . छोटे से दिल में कैसे रहती.
~Sard Mausam Meiin Bohat Yaad Aatey Haii, Dhund Meiin Lipte Huye Waade Unke .. ‘
इतना खुश रहो के साला गम बी कहे गलती से मे यहा कहा आ गया।
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