सब मशरूफ थे नया साल मनाने में मैंने मेरी रूठी खुशियों को मना लिया..
~Phiir Jab Meiin Uske Biina Jeeney Lagii , Usee Merii Kamii Mehsoos Hone Lagi .. ‘
वो बड़े घर की थी साहब, . छोटे से दिल में कैसे रहती.
मै और मेरा रब्ब रोज भूल जाते है वह मेरे गुनाहो को मै उसकी रहमतो को
सुना है तुम ज़िद्दी बहुत हो, मुझे भी अपनी जिद्द बना लो.!!
~ बड़ा अजीब सा जहर था उसकी यादों का सारी उम्र गुजर गयी मरते – मरते .. ^
कोई नहीं बचाकर रखना चाहता है यादें जान से प्यारे खत बेरुखी से जलने लगे हैं !!
तुम जिंदगी की वो कमी हो , जो जिंदगी भर रहेगी !!!
~Umar Bhar Rahugi Gulam Haii Koi Jo Us Sa Mila De .. ‘
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