शाख से फूल तोड़कर मैंने सीखा.. अच्छा होना गुनाह है, इस जहाँ में..!!
हमसफ़र खूबसूरत नहीं.. सच्चा होना चाहिए
पसंन्द आया तो दिल में , नही तो दिमाग में भी नही ।
छोड़ना आसान होता है लेकिन भूलना नही
Ek tera noor hi kaafi h.. Sare jhaa ki roshni k liye
~Apni Galti’On Pe Parda Daal Kar, Har Shakhs Keh Raha Haii Zamana Khraab Haii . ‘
क्यों याद करेगा कोई बेवजह मुझे ऐ खुदा , लोग तो बेवजह तुम्हे भी याद नहीं करते !!”
काग़ज़ पे तो अदालत चलती है.. हमने तो तेरी आँखो के फैसले मंजूर किये।
लोग आँसुओं मे पढ़ते थे नाम तेरा.. इसीलिए हमने रोना छोड़ दिया.. :)) –
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