चलो मंजूर है तेरी बेरुखी मुझको बस इतना करो कि बेवफा मत होना
साथ चलता है मेरे दुआओ का काफिला . किसमत से कह दो अकेला नही हुँ मै
!! वो अब भी आती है ख्वाबों में मेरे.. ये देखने की मैं उसे भूला तो नहीं…..!!
तन्हाई की सरहदें और भीगी पलके….!! हम लुट जाते हैं, रोज तुम्हें याद करके….!
खुद ही दे जाओगे तो बेहतर है ,, वरना हम दिल चुरा भी लेते हैं..!
अंत में लिखी है दोनों की बर्बादी, आशिक़ हो या हो आतंकवादी.
तुम जिंदगी की वो कमी हो , जो जिंदगी भर रहेगी !!!
सुख मेरा, काँच सा था.. ना जाने कितनों को चुभ गया..!!
मेहनत इतनी खामोशी से करो कि . “सफलता शोर मचा दे”
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *