वो बड़े घर की थी साहब, . छोटे से दिल में कैसे रहती.
शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आपकी कमी सी है,
अब तेरी याद के साथ मेरा हरपल ख़ास है, तू पास नहीं है इसलिए दिल थोडा उदास है
मैं बुरा हूँ तो बुरा ही सही… …. कम से कम “शराफत” का दिखावा तो नहीं करता
तुमसे ऐसा भी क्या रिश्ता हे? दर्द कोई भी हो.. याद तेरी ही आती हे।
-Ishq Kiiya Jo Us’se Phir Usko Aazmana Kya?
लोग क़दर तभी करते हैं जब उन्हें मुँह लगाना छोड़ दो
कभी तू नाराज़ कभी मैं नाराज़.. उफ्फ ये मोहब्बत उफ्फ ये अंदाज़…😍😘
काजल ज़रूरी है तुम्हारी आँखों को, मेरी आँखों को डूबने की हद्द पता रहती है..
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