अंत में लिखी है दोनों की बर्बादी, आशिक़ हो या हो आतंकवादी.
चलो मंजूर है तेरी बेरुखी मुझको बस इतना करो कि बेवफा मत होना
काग़ज़ पे तो अदालत चलती है.. हमने तो तेरी आँखो के फैसले मंजूर किये।
~Izhar’E-Ishq Me Aiisa Hua Kuch Wo, Dil Ka Haqdaar To Hua Lekin Mera Naa Hua .. ‘
वो जवानी ही क्या जिसे लोग पलट कर न देँखेँ
पी लिया करते हैं जीने की तमन्ना में कभी, डगमगाना भी ज़रूरी है संभलने के लिए।
मोहब्बत सिर्फ मोहब्बत चाहती है, किसीकी महेरबानी नहीं !!
! वो अब भी आती है ख्वाबों में मेरे.. ये देखने की मैं उसे भूला तो नहीं…..!!
~Uss Mor Se Shuru Karain Aa Phir Se Zindagi, Jab Har Sham Haseen Thi Or Hum-Tum The Ajnabii .. ‘
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