सांपो के मुक्कदर में.. वो जहर कहाँ, जो आजकल इन्सान सिर्फ बातों मे ही उगलतें है।
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Tumne Samjha Hi Nahii Aur Na Hii Samjhana Chaha, Hum Chahtey Hii Kya Thay Tumse Tumhare Siiwa ..
गुज़र रहा हूँ तेरे शहर से क्या कहूँ क्या गुज़र रही है.
बड़ी अजीब सी मोहब्बत थी तुम्हारी, पहले पागल किया, फिर पागल कहा, फिर पागल समझ कर छोड़ दिया.
जमाना कहता है रात को नींद अच्छी आती है, मेरी नींदों में तो तेरी यादें ही शोर मचाती है !!
अगर आप अपनी रोटी अच्छी पका रहे है तो, #मक्खन लगाने वाले अपने आप आपके पास आ जाएँगे.
*तलब ये है कि…. मैं सर रखूँ तेरे सीने पे* *और तमन्ना ये कि….मेरा नाम पुकारती हों धड़कनें तेरी*
ना जाने क्यों मुझे लोग मतलबी कहते है एक तेरे सिवा दुनियां से मतलब नहीं मुझे।
हम ना पा सके तुझे मुदतो के चाहने के बाद , ओर किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमे Continue Reading..
