तू याद रख, या ना रख… तू याद है, ये याद रख…
रोज़ ख्वाबों में जीता हूँ वो ज़िन्दगी … जो तेरे साथ मैंने हक़ीक़त में सोची थी
ख़्वाहिशों की चादर तो कब की तार तार हो चुकी… देखते हैं वक़्त की रफ़ूगिरी, क्या कमाल करती है|
थमने लगी है नब्ज़ की रफ्तार भी अब तो। असर उनसे बिछड़ने का.. बड़ा जानलेवा है।।
Mere Baad Na Aayega Tumhe Chahat Ka Maza Tum Sabse Kehte Phiroge Mujhe Chaho Uski Tarah !!
~Tujhe Roz Dekhu Kareeb Se Mere Shoq Bhii Haii Ajeeb Se .. ^
Log Doosro ki Burayiya Chupana Nahi Chahte Aur Apni Dikhana
अजीब सबूत माँगा उसने मेरी मोहब्बत का कि मुझे भूल जाओ तो मानूँ मोहब्बत है !
वो आईने को भी हैरत में डाल देता है …. किसी किसी को खुदा ये कमाल देता है
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