Kuch Naa Tha Mere Paas Khoney Ko, Tu Jo Mila Toh Darr Gayi Hoon Meiin ..
-Woh Niibha Na Saka Yeh Alag Baat Hai, Par Kiiye The Jo Waade Gazab Ke The .. ‘
सोचा था आज कुछ तेरे सिवा सोचूँ तब से सोच में हूँ कि और क्या सोचूँ
-Qafiila Khushbuon Ka Guzra Haii Tum Kahin Aas Paas Ho Shayad .. ‘
वो भी आधी रात को निकलता है और मैं भी, फिर क्यों उसे “चाँद” और मुझे “आवारा” कहते हैं
मुझे फर्क नहीं पता अपनो और गैरो का, हर कोई हँसा है मुझे रोता देखकर
ऐब भी बहुत हैं मुझमें और खूबियां भी.. ढूँढने वाले तूं सोच, तुझे चाहिए क्या मुझमे..
वफ़ा का तो वजूद ही नहीँ रहा यारो किस्से भी उन्ही के हैं जो बेवफा हैं।
कर्म भूमि पे फल के लिए श्रम सबको करना पडता है रब सिर्फ लकीरेँ देता है रंग हमको भरना पडता Continue Reading..
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