Tumhain tarteeb dy raha hon main, Mery andar bikhar gaye ho tum…!!!
दोपहर तक बिक गया बाजार का हर एक झूठ , और मैं एक सच लेकर शाम तक बैठा
इतनी बेरुखी ना करो कुछ तो रहम करो, तुम पर मरते हैँ तो क्या मार ही डालोगे…
जब आपकी ज़रूरतें कम होंगी , तब आपको ज़रुरत से ज़्यादा मिलेगा …
“फ्रेंड — यार उसने मुझे I miss u लिख कर भेजा है क्या करूँ मै ? मी – यार तू Continue Reading..
~Jisam Chune se Mohabbat Nahi Hotii Yeh Woh Jazba Hai Jisay Emaan Kehtey Hain .. ‘
तुम से बिछड के फर्क बस इतना हुआ … तेरा गया कुछ नहीँ और मेरा रहा कुछ नहीँ…!
हम तो नरम पत्तों की शाख़ हुआ करते थे. छीले इतने गए कि “खंज़र ” हो गए….
चुप रहना ही बेहतर है, जमाने के हिसाब से ! धोखा खा जाते है, अक्सर ज्यादा बोलने वाले !!
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