बहुत शख्स मिले जो समझाते थे मुझे…. काश…कोई मुझे समझने वाला भी मिलता….
बारिश और महोबत दोनों ही यादगार होते हे,❤ बारिश में जिस्म भीगता हैं और महोबत मैं आँखे.
वो भी आधी रात को निकलता है और मैं भी, फिर क्यों उसे “चाँद” और मुझे “आवारा” कहते हैं
ख़ुशी कहा हम तो “गम” चाहते है, ख़ुशी उन्हे दे दो जिन्हें “हम” चाहते हे. –
निग़ाहों में अभी तक दूसरा कोई चेहरा ही नहीं आया.. !! भरोसा ही कुछ ऐसा था,तेरे लौट आने का…!!
Yeh Kurbatein To Bohat Imtihan Leti Hain, Kisi Se Waasta Rakhna To Door Ka Rakhna.
” मेरी हस्ती को तुम क्या पहचानोगे, हजारो मशहूर हो गए मुझे बदनाम करते करते ” l
जब_मिलो किसी से तो जरा_दूर का रिश्ता_रखना, बहुत_तङपाते हैँ अक्सर सीने ❤ से लगाने_वाले ।।
छोटे लोग और छोटे नोट ही मुसीबत में काम आते हे, मै भी इन्ही मे से एक हूँ व्यवहार बनाए Continue Reading..
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