बहुत शख्स मिले जो समझाते थे मुझे…. काश…कोई मुझे समझने वाला भी मिलता….
सांपो के मुक्कदर में.. वो जहर कहाँ, जो आजकल इन्सान सिर्फ बातों मे ही उगलतें है।
जब भी देखती है मुझे, नज़रें झुका लेती है वो, खुदा का शुक्र है, हमें पहचान तो लेती है वो।
भूख तो एक रोटी से भी मिट जाती माँ, अगर थाली की वो एक रोटी तेरे हाथ की होती
सुना है आजकल तेरी मुस्कुराहट गायब हो गयी है, तू कहे तो फिर से तेरे क़रीब आ जाऊँ.
-Jeena Itna Mushkiil Toh Nahii Bas Thorii Sii Waffa Chahiiye .. ‘
मुझे पढ़कर भी जो तुम जवाब नहीं देते हो न …!! याद करोगे जब हम तेरे लिए लिखना छोड़ देंगे Continue Reading..
दिन में ना जाने कितनी बार होता है ऐसा… तेरी याद आना और मेरा उदास हो जाना
Gul shaakh se bichrey to kahin ka nahin rehta, Tum khud ko juda meri zaat se kuch soch ke karna..
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