जो भी आता हे समजा के चला जाता हे………. पर कोई समझने वाला नही मिलता
गुज़र रहा हूँ तेरे शहर से क्या कहूँ क्या गुज़र रही है.
एक बात बता😑 तुमने मेरे बगैर भी, जी कर दिखा दिया, अब सवाल ये है कि “दिल” का क्या हुआ
बहुत जुदा है औरो से मेरे दर्द की कहानी. जख्म का कोई निशाँ नहीँ और दर्द की कोई इँतहा नही.
अपने होंठो को मेरे होंठो से लगा दो, कोई शिकायत होगी भी तो कह नहीं पाउँगा..!!
~Tere Baad Kon Roky’Ga Humein, Hum Khud Ko Jee Bhar k Barbaad Karein’Gy .. ‘
एहसान किसी का वो रखते नही मेरा भी लोटा दिया . जितना खाया था नमक मेरे जख्मोँ पर लगा दिया
तू मुझसे मिलने कभी नक़ाबों मे ही आ ! ख़ुद न मुमकिन तो ख़्वाबों मे ही आ !!
जा और कोई ज़ब्त की दुनिया तलाश कर ऐ इश्क़ हम तो अब तेरे काबिल नहीं रहे।
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