Muhabbat kesi bhi h0 Sahib…! Sajda kerna sikha deti hai…!
चुनौतियो को स्वीकार करो क्योकि इससे या तो सफलता मिलेगी या सीख
जरा सी बात पर बरसों के याराने गए चलो अच्छा है पर कुछ लोग तो पहचाने गए
जिसको मुझ पर भरोसा नहीं है, उसकी मेरी जिंदगी में कोई जरुरत नहीं है !!
ये काजल, ये खुली-खुली जुल्फें , तुम यूँ ही जान माँग लेती इतना इंतजाम क्यूँ किया
गुज़रे है आज इश्क के उस मुकाम से, नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से ।
तू मुझे भुलाने की कोशिश तो कर, पल पल याद आऊँगी खुशबू की तरह
*मैंने माँगा था थोड़ा सा उजाला अपनी ज़िन्दगी में* *चाहने वालो ने तो आग ही लगा दी…!
इतना टूटा हूँ के छूने से बिखर जाऊँगा, अब अगर और दुआ दोगे तो मर जाऊँगा
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