झूठ कहूँ तो लफ़्ज़ों का दम घुटता है, सच कहूँ तो लोग खफा हो जाते हैं..
सीख रहा हूँ धीरे-धीरे तेरे शहर के रीवाज . जिस से मतलब निकल जाये उसे जिंदगी से निकाल दो
मैं रोज अपने खून का दिया जलाऊँगा, ऐ इश्क तू एक बार अपनी मजार तो बता
मत चाहो किसी को इतना टूटकर ज़िन्दगी में, अगर बिछङ गये तो हर एक अदा तंग करेगी!!
इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है…. लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर !!
सारी उम्र बस एक ही सबक* याद रखना, दोस्ती और “दुवा”* में बस नियत साफ़ रखना.
मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे, अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती ।
वो रोटी चुरा के चोर हो गया. . . लोग मुल्क खा गए, कानून लिखते लिखते.
ज़िंदगी भर मौत के लिए दुआ करते रहे खुद से.. और जब जीना चाहा तो दुआ क़बूल हो गई…!!
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