तकलीफ कि इन्तेहा तो तब है, जब लोग जिंदा रहे और रिश्ते मर जाये…
“मर्दाना कमजोरी” के इलाज पर रंगी हुई है शहरों की दीवारें… और लोग कहते हैं कि “औरतें कमज़ोर” हैं…
बड़े अजीब से हो गए रिश्ते आजकल.. सब फुरसत में हैं पर वक़्त किसी के पास नही
जिँन्दगी मे इतनी शिद्दत से निभाना अपना किरदार . के परदा गिरने के बाद भी तालियां बजती रहे
सुना है कोई और भी चाहने लगा है तुमको, हमसे बढ कर अगर चाहे तो उसी के हो जाना..
सुनसान सी लग रही है , आज ये शायरों की बस्ती….* *क्या किसी के दिल मे , अब दर्द नहीं Continue Reading..
Kaun yaad rakhta hai pyar karne walo ko, Jo jitni gahri chot deta hai, wo utna hi yad rahtaa hai..
जो बिना ठोकर खाए मजिँल तक पहुच जाते है उनके हाथ अनुभव से खाली रह जाते है
इतनी बेरुखी ना करो कुछ तो रहम करो, तुम पर मरते हैँ तो क्या मार ही डालोगे…
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