“सूखे हुए दरिया से इक नाव लगी कहने, अपना भी जाने अब किस बात से रिश्ता है
नहीं हो सकता कद तेरा ऊँचा किसी भी माँ से ऐ खुदा… तू जिसे आदमी बनाता है, वो उसे इन्सान Continue Reading..
एक सुखी पति था………….. * * * * * * * * * * जाँच चल रही है किसका था।
आशियाने बनें भी तो कहाँ जनाब, जमीनें महँगी हो चली हैं और दिल में लोग जगह नहीं देते
निग़ाहों में अभी तक दूसरा कोई चेहरा ही नहीं आया.. !! भरोसा ही कुछ ऐसा था,तेरे लौट आने का…!!
~Zara Sa Baat Karne Ka Saleeqa Seekhlo, Idar Tum Lab Hilatey Ho Udr Dil Toot Jaya Kartey Haii .. ‘
Wo samjhe na samjhe hamare jazbat ko hum manege unki har baat ko hum chale jaayenge ek din is duniya Continue Reading..
..जब था तो बहुत पुख्ता था , एक शख़्स से रिश्ता…. ….टुटा है , तो अब टुकड़े संभाले नहीं जाते…
हम तो नरम पत्तों की शाख़ हुआ करते थे. छीले इतने गए कि “खंज़र ” हो गए….
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