सुनो ना….हम पर मोहब्बत नही आती तुम्हें, रहम तो आता होगा?
मै नही जानता मै क्यो लिखता हूँ, बस ये खाली कागज मुझसे देखे नही जाते
Mat puchh kaise guzar rahi hai zindagi, Us daur se guzar rahi hu jo guzarta hi nahi
~Dhoka Deti Hai Masoom Chehron Ki Chamak Aksar, Har Kaanch K Tukray Ko Heera Nahi Kehte .. ^
वो कर रहे थे महफिल मे जिक्र अपनी वफा का . नजर मुझ पर पडी तो बात ही पलट दी
काश में लौट जाओ बचपन की वादियो में जहाँ कोई न जरूरत थी और ना कोई जरुली था
हमारे कत्ल के लीऎ तो मीठी जुबांन ही काफी है… अजिब शक्स थे वो जो खंजर तलाश रहे थे..!
मौत भी अजीब चीज़ है मरने के लिये साली पूरी ज़िन्दगी जीनी पड़ती हे….
आप कब सही थे। इसे कोई याद नही रखता। लेकिन आप कब गलत थे इसे सब याद रखते है।…
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