सुनो ना….हम पर मोहब्बत नही आती तुम्हें, रहम तो आता होगा?
बना के “ताजमहल” एक दौलतमंद आशिक ने….. “गरीबों” की मोहब्बत का तमाशा बना दिया।।
पत्थर को लोग इसलिए पूजते हैं क्योंकि विश्वास करने लायक इंसान नहीं मिलता।
दश्त था, सेहरा था, तन्हाई थी, वीरानी थी, अपने ही अपने नही थे…बस यही हैरानी थी.
हजार टुकड़े कर दिए उसने मेरे दिल के।।। फिर वो खुद रो पड़ी,,हर टुकड़े पर अपना नाम देख कर।।
जा और कोई ज़ब्त की दुनिया तलाश कर ऐ इश्क़ हम तो अब तेरे काबिल नहीं रहे।
Teri Yaadein Kaanch K Tukrey… Aur Mera DiL Nangay Paaon…
~Sard Mausam Meiin Bohat Yaad Aatey Haii, Dhund Meiin Lipte Huye Waade Unke .. ‘
क्या बयां करूँ कि लब अब खामोश रहते हैं, जुदा होकर उनसे हम अधूरे से लगते हैं
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